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विभागीय विवरण

ग्रामीणों में आत्मबल एवं साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करने उनमें आत्म निर्भरता एवं अनुशासन की आदत डालने तथा आत्म सुरक्षा एवं अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से वर्ष 1947 में प्रान्तीय रक्षक दल का गठन किया गया था । वर्ष 1952 में काउन्सिल आफ फिजिकल कल्चर को प्रान्तीय रक्षक दल में विलीन कर दिया गया, जिसके फलस्वरूप ग्रामीण खेलकूद, व्यायामशालाओं के माध्यम से शारीरिक सम्बर्द्धन का कार्य एवं युवा आन्दोलन को सुदृढ करने का कार्य प्रारम्भ किया गया ।

वर्ष 1956 में " युवा आन्दोलन संगठन" की स्थापना की गयी, जिसके अन्तर्गत ग्रामीण युवाओं के संगठन युवक मंगल दल बनने लगे । ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में प्रेरक एवं सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 1971 में प्रान्तीय रक्षक दल का नाम बदल कर प्रादेशिक विकास दल कर दिया गया । वर्ष 1974 में स्थापित जनशक्ति संचालन निदेशालय को वर्ष 1982 में युवा कल्याण निदेशालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया और इस प्रकार प्रान्तीय रक्षक दल/विकास दल एवं युवा कल्याण निदेशालय का वर्तमान स्वरूप और दायित्व और दायित्व निर्धारित हुआ ।

विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में युवाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न कराये जाते है, जहां एक ओर वर्दीधारी दल के सदस्य " लोक शान्ति, जनजीवन एवं जन सम्पत्ति की रक्षा के कार्य में संलग्न रहते हैं, वही दूसरी ओर युवक मंगल दल एवं महिला दल के सदस्य युवा शक्ति का विकास, अनुशासन, खेलकूद, व्यायाम, साहसिक कार्यक्रमों आदि के माध्यम से शारीरिक संवंर्धन के अतिरिक्त मानसिक सोच में बदलाव सांस्कृतिक बेहतरी, सदभाव सृजन और बन्धुत्व के विकास के कार्य करते है तथा युवा केन्दों पर आयोजित होने वाली गोष्ठियों आदि का आयोजन कराते हैं। भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं में भी युवक मंगल दल एवं मंगल दल सार्थक भूमिका का निर्वहन करते है । कुल मिलाकर उद्देश्य यह है कि ग्रामीण जीवन स्वस्थ रहे तथा ग्रामीण जन सुरक्षित रहें, जिससे सृजनात्मक एवं कल्याणकारी कार्यो को गति दी जा सकें ।

प्रान्तीय रक्षक दल का गठन शासनादेश संख्या-6588-जेड/8-1060-बी-1947 दिनांक-20-10-1947 के अधीन किया गया था इसका उद्देश्य रचनात्मक प्रगति एवं साम्प्रदायिक भेदभाव रहित युवा स्वयं सेवकों का एक शक्तिशाली एवं सुसंगठित संगठन सरकारी प्रेरणा से स्थापित करना था, जिससे ग्रामीणों में आत्मबल और सांप्रदायिक मेलजोल बढे और समस्त जनता में आत्म-सुरक्षा, आत्म निर्भरता, अनुशासन तथा अपराधों की रोकथाम आये और उन्हें तदनुसार अभ्यस्त भी किया जा सकें । तदोपरान्त वर्ष 1948 में उ0प्र0 प्रान्तीय रक्षक दल अधिनियम 1948  के माध्यम से प्रान्तीय रक्षक दल को वैधानिक दर्जा देते हुए इसकी भूमिका एवं उद्देश्यों का पुष्टिकरण भी कर दिया गया । वर्ष 1952 में काउन्सिल आफ फिजिकल कल्चर को प्रान्तीय रक्षक दल में विलीन कर दिया गया, जिसके फलस्वरूप ग्रामीण खेलकूद, व्यायामशालाओं एवं शारीरिक संवर्धन के अन्य मामलों का निर्वहन एवं प्रदेश में युवा आन्दोलन को सुदृढ करने के उद्देश्य से सामुदायिक योजना प्रशासन समिति की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष-1956 में "युवक मंगल दल"  बनने लगे।

वर्ष 1971 में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से और अधिक सम्बद्ध करने के उद्देश्य से "प्रान्तीय रक्षक दल" का नाम परिवर्तित करके "प्रादेशिक विकास दल" कर दिया गया । वर्ष 1974 में प्रदेश में जनशक्ति संचालन योजना निदेशालय की स्थापना की गयी, जिसमें ससाधनों के समुचित एवं गौरवपूर्ण उपयोग को ध्येय में रखा गया ।

कालान्तर में वर्ष 1982 में इस जनशक्ति संचालन निदेशालय को परिवर्तित करते हुए "युवा कल्याण निदेशालय" की स्थापना की गयी, जिसमें संसाधनों के समुचित एवं गौरवपूर्ण उपयोग को ध्येय में रखा गया और इसे प्रादेशिक विकास दल के साथ स्थापित किया गया, फलस्वरूप प्रान्तीय रक्षक दल विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग के रूप में इसका वर्तमान स्वरूप और दायित्व और दायित्व स्पष्ट हुआ ।

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