अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियां और कर्तव्य

   
 

प्रशासकीय अधिकारों का प्रतिनिधायन विषयक निर्गत शासनादेश संख्या-

 

2325/-38-2-137/प्रा.वि.द./76, दिनांक 01 जुलाई, 1977, प्रशासकीय अधिकारों का प्रतिनिधायन विषयक निर्गत शासनादेश संख्या-536/पचास-यु.क-137/76, दिनांक 22 मार्च, 1988 (प्रथम संशोधन) एवं शासनादेश संख्या-1298/पचास-यु.क.-88-137 पी.वी.डी./76, दिनांक 24 अक्टूबर, 1988 (द्वितीय संशोधन) के द्वारा विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों के सेवा सम्बन्धी मामलों के निस्तारण हेतु विभिन्न सक्षम अधिकारियों को अधिकार प्रदत्त किये गये हैं, जिसके अनुक्रम में जिला स्तर एवं प्रदेश स्तर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के द्वारा अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करते हुए निर्णय लिये जाते हैं।

विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के मामले सम्मिलित हैं:-

महानिदेशक, प्रान्तीय रक्षक दल/विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश में विभाग के समस्त निर्णय लेने के अधिकार निहित हैं। विभिन्न कार्यक्रमों/योजनाओं के क्रियान्वयन/संचालन हेतु मुख्यालय पर सहायक निदेशक, सहायक समादेष्टा एवं सहायक लेखाधिकारी को कार्य विभाजन करके अलग-अलग प्रभारी अधिकारी बनाया गया है, जिनके द्वारा संयुक्त निदेशक के माध्यम से प्रस्तुत पत्रावलियों पर निर्णय लेने के अधिकार महानिदेश में निहित हैं।
इसी प्रकार जनपद स्तर पर जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी के निर्देशन में कार्य करते हैं। व्यायाम प्रशिक्षक तथा क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी के नियंत्रण में कार्य करते हैं।

अपने कृत्यों के लिए स्वयं द्वारा स्थापित मापमान-

प्रत्‍येक वर्ष क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी को विकास खण्ड में आने वाले समस्त न्याय पंचायत स्तर पर 16 वर्ष से कम आयु के बालक-बालिकाओं को विभिनन खेलों के अन्तर्गत चिन्हित करके विकासखण्ड स्तर पर खिलाड़ियों का चयन किया जाता है। इसी प्रकार न्याय पंचायत स्तर पर पुरूषों की खुली ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता आयोजन करके खिलाड़ियों का चयन किया जाता है।
विकास खण्ड स्तर पर चयनित युवक मंगल दल एवं महिला मंगल दलों को उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों के आधार पर प्रोत्साहनस्वरूप रू० 2,000/- प्रति दल की दर से धनराशि प्रदान की जाती है।
व्यायाम प्रशिक्षक द्वारा जनपद के स्थापित ग्रामीण व शहरी व्यायामशालाओं में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।

जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी जनपद स्तर पर जिला योजना के अन्तर्गत विभाग से सम्बन्धित जिला योजना की संरचना तेयार करना, बजट प्राविधान कराना एवं राज्य सेक्टर के अन्तर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं में स्वीकृत धनराशि का सदुपयोग/व्यय निदेशालय द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार सुनिश्चित करान के लिए उत्तरदायी हैं।

अपने द्वारा या अपने नियंत्रणाधीन धारित या अपने कर्मचारियों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किए गए नियम, विनियम, अनुदेश, निदेशिका और अभिलेख-

विभाग द्वारा नियम, अधिनियम व शासनादेशों की एक पुस्तिका तैयार कराई गई है, जिसमें निम्नलिखित का समावेश किया गया है-

  • प्रान्तीय रक्षक दल एक्ट एण्ड रूल्स-1948

  • उत्तर प्रदेश प्रादेशिक विकास दल (मुख्यालय) लिपिक वर्गीय सेवा नियमावली-1979

  • उत्तर प्रदेश प्रादेशिक विकास दल अधीनस्थ सेवा नियमावली-1980

  • उत्तर प्रदेश युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल और प्रादेशिक विकास दल अधिकारी सेवा नियमावली-1998

  • प्रशासकीय अधिकारों का प्रतिनिधायन विषयक शासनादेश संख्या-2325/38-2-137 प्रा.वि.द/76, दिनांक 01 जुलाई, 1977

  • प्रशासकीय अधिकारों का प्रतिनिधायन विषयक शासनादेश संख्या-536/पचास-यु.क.-137/76, दिनांक 22 मार्च, 1988 (प्रथम संशोधन)

  • प्रशासकीय अधिकारों का प्रतिनिधायन विषयक शासनादेश संख्या-1298/पचास-यु.क.-88/137 पी.वी.डी./76, दिनांक 24 अक्टूबर, 1988 (द्वितीय संशोधन)

  • ग्रामीण युवक समिति का विधान

  • विभागीय कार्यक्रमों से सम्बन्धित शासनादेश

  • खेलकूद आयोजन सम्बन्धी शासनादेश

  • राष्ट्रीय युवा पुरस्कार की योजना के सम्बन्ध में विभागीय निर्देश।

  • युवा केन्द्रों की स्थापना के सम्बन्ध में शासनादेश।

  • ग्रामीण स्टेडियम के सम्बन्ध में शासनादेश।

  • अखाड़ों की स्थापना के सम्बन्ध में शासनादेश।

  • स्वयं-सेवकों को ड्यूटी पर लगाये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश व विभागीय निर्देश।

  • रैंक एवं बैजेज के सम्बन्ध में शासनादेश।

ऐसे दस्तावेजों के, जो उसके द्वारा धारित या उसके नियंत्रणाधीन हैं, प्रवर्गों का विवरण।

(क)- विकास खण्ड स्तर
विकासखण्ड स्तर पर निम्नलिखित अभिलेख रखे जाते हैं :-

  1. स्वयं-सेवकों की नामावली पंजी

  2. युवक/महिला मंगल दलों को प्रोत्साहन स्वरूप दी जाने वाली सामग्री से सम्बन्धित वितरण पंजी।

  3. विकासखण्ड में गठित युवक/महिला मंगल दलों का विवरण।

  4. ब्लाक स्तरीय खेलकूद में चयनित हुए खिलाड़ियों की पंजी।

  5. विकासखण्ड स्तर पर निर्मित व्यायामशाला/ग्रामीण स्टेडियमों की पंजी एवं उसमें उपलब्ध व्यायामशाला तथा खेलकूद से सम्बन्धित उपकरणों की पंजी।

(ख)- जनपद स्तर
जनपद स्तर पर निम्नलिखित अभिलेख रखे जाते हैं :-

  1. जनपद में कार्यरत क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारियों/कनिष्ठ लिपिकों/चतुर्थ श्रेणी से सम्बन्धित सेवाभिलेख।

  2. जनपद में प्रशिक्षित स्वयं-सेवकों का विकासखण्डवार नॉमिनल रोल।

  3. युवक/महिला मंगल दलों के गठन सम्बन्धी पंजिका।

  4. विकासखण्ड स्तर पर युवक/महिला मंगल दलों को प्रोत्साहन स्वरूप वितरित की जाने वाली सामग्री की पंजी।

  5. जनपद में निर्मित व्यायामशाला, ग्रामीण (आउटडोर/इण्डोर) स्टेडियम, युवा केन्द्र, युवा छात्रावासों में उपलब्ध उपकरणों से सम्बन्धित पंजी।

  6. जनपद के विकासखण्डों से चयनित खिलाड़ियों से सम्बन्धित पंजी एवं जनपद स्तर पर चयनित खिलाड़ियों की पंजिका।

किसी वयवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के सम्बन्ध में जनता के सदस्यों के परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं-

नई पंचायतीराज व्यवस्था के अन्तर्गत विकास खण्ड स्तर पर चलाए जा रहे विभागीय कार्यक्रम, यथा-युवक/महिला मंगल दलों का गठन/प्रोत्‍साहन, अखाड़ा एवं व्यायामशालाएँ ग्राम पंचायत के माध्यम से संचालित की जाती हैं।

ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसका भाग रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अनय निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुँच होगी, विवरण-

शासन द्वारा गठित उ०प्र० राज्य युवा कल्याण परिषद को इस विभाग से सम्बद्ध किया गया है, जिसके पदेन अध्यक्ष मा० मुख्य मंत्री जी हैं तथा कार्यकारिणी अध्यक्ष विभागीय मा० युवा कल्याण मंत्री होते हैं। परिषद के सदस्यों में शासकीय तथा गैर शासकीय व्यक्तियों को रखा गया है। परिषद का उद्देश्य युवा वर्ग के लिए नीति निर्धारित करना, योजना/कार्यक्रमों के लिए धनराशि उपलब्ध कराना तथा विभिन्न विषयों पर मार्ग दर्शन प्राप्त करना है। इस परिषद में जनता के विभिनन वर्गों के प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में नामित किया जाता है, जिससे स्पष्ट है कि जनता तक इस परिषद की बैठकों एवं बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की सीधी पहुँच है।

अपने प्रत्येक अधिकारी/कर्मचारी द्वारा प्रापत मासिक पारिश्रमिक जिसमें उसके विनियमों में यथा उपबन्धित प्रतिकर की प्रणाली सम्मिलित हो-

इस बिन्दु की पूर्ण सूचना एक्सेल पर ग्रास सेलरी के नाम से है, जिसे बिन्दु से जोड़ना है।